Share market :- क्या चुनावी परिणाम सचमुच शेयर बाजार पर प्रभाव डालते हैं?

शेअर बाजार पर इलेक्शन का प्रभाव?

Highlights -:

                                 1) चुनाव के दौरान शेयर बाज़ार
                                 2) निवेशकों का दृष्टिकोन

                                 3) वर्तमान मे शेअर बाजार          

1) चुनाव के दौरान शेयर बाज़ार -:

सामान्यत: माना जाता है कि चुनावी सालों में शेयर बाजार में अधिक वोलेटिलिटी होती है. निवेशक चुनावी परिणामों से प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें मौकों का उपयोग करने का विचार करना चाहिए. हालांकि, दीर्घकालिक निवेशकों को इस प्रकार की परिस्थितियों को नजरअंदाज करने और अपने जोखिम और लक्ष्यों के साथ ही निवेश करना चाहिए.

 

विभिन्न प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में सेंसेक्स ने दीर्घकालिक धन बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, और इस क्षेत्र में कोई विशेष परिवर्तन नहीं दिखा गया है।

 

2) निवेशकों का दृष्टिकोन -:

शेयर बाजार से जुड़े व्यक्तियों का कहना है कि भाजपा की सरकार और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश की इकोनॉमी में सुधार हुआ है। इसका बाजार पर प्रभाव दिखाई देता है। विभिन्न देशों में बसे व्यक्तियों का विश्वास है कि देश की इकोनॉमी में सुधार हो रहा है, जिससे शेयर बाजार में मुनाफा हो रहा है। उनका मानना है कि भाजपा ने सियासत में स्थिरता लाई है, जिससे शेयर मार्केट में उच्ची दिखाई देती है।

3) वर्तमान मे शेअर बाजार -:

भारतीय अर्थव्यवस्था वर्तमान में महत्वपूर्ण स्थान पर है, जिसमें जीएसटी, दिवालियापन का कानून, प्रत्यक्ष कर का विस्तार, संगठित क्षेत्र के निर्णय, और तेजी से बढ़ती हुई डिजिटल अर्थव्यवस्था सकारात्मक संकेत हैं. राजनीतिक दलों में भी स्थिर आर्थिक नीतियों को प्रोत्साहित करने का संकल्प है, जिससे स्थिर विकास संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा.

पुराने आंकड़े न केवल दीर्घावधि में देश की ग्रोथ को समर्थन करते हैं, बल्कि ये भी सिद्ध करते हैं कि राजनीतिक और भौगोलिक घटनाओं के बावजूद, दीर्घकालिक निवेशकों को लाभ होता है। 2019 की स्थिति के मद्देनजर, शेयर मार्ग में निवेश बढ़ाने का अच्छा समय है।

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